उत्तरकाण्ड · दोहा 106 (ख) · दोहा
सो दयाल नहिं कहेउ कछु उर न रोष लवलेस।
सो दयाल नहिं कहेउ कछु उर न रोष लवलेस।
अति अघ गुर अपमानता सहि नहिं सके महेस॥ १०६ (ख)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.106 · पुस्तक पृ. 1008, 1009
भावार्थ और शब्दार्थ
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1सो दयाल नहिं कहेउ कछु उर न रोष लवलेस।
उन दयालु गुरु ने कुछ नहीं कहा; उनके हृदय में क्रोध का लेश भी नहीं था।
English explanation
That compassionate guru said nothing; there was not the slightest trace of anger in his heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | वे; वही गुरु | that guru; he |
| दयाल | दयालु | compassionate |
| नहिं | नहीं | not |
| कहेउ | कहा | said |
| कछु | कुछ | anything |
| उर | हृदय में | in his heart |
| न | नहीं था | there was no |
| रोष | क्रोध | anger |
| लवलेस | अत्यल्प अंश भी | even the slightest trace |
2अति अघ गुर अपमानता सहि नहिं सके महेस॥ १०६ (ख)॥
गुरु का अपमान करना अत्यंत बड़ा पाप था; महेश उसे सहन नहीं कर सके।
English explanation
Dishonoring the guru was a very grave sin; Shiva could not tolerate it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अति | अत्यंत; बहुत बड़ा | extremely; very grave |
| अघ | पाप | sin |
| गुर | गुरु का | of the guru |
| अपमानता | अपमान करना; अनादर | dishonoring; disrespect |
| सहि | सहन कर | bear; tolerate |
| नहिं | नहीं | not |
| सके | सके | could |
| महेस | महेश अर्थात् शिव | Shiva, the great Lord |
| ख | पद-संदर्भ का चिह्न ‘ख’ | verse-reference marker ‘ख’ |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 106 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 7.106
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिका अपनी पूर्वजन्मकथा और कलिमहिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1008, 1009
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।