उत्तरकाण्ड · दोहा 81 (ख) · दोहा
सोइ सिसुपन सोइ सोभा सोइ कृपाल रघुबीर।
सोइ सिसुपन सोइ सोभा सोइ कृपाल रघुबीर।
भुवन भुवन देखत फिरउँ प्रेरित मोह समीर॥ ८१ (ख)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.81 · पुस्तक पृ. 983, 984
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1सोइ सिसुपन सोइ सोभा सोइ कृपाल रघुबीर।
वही बालपन, वही शोभा और वही कृपालु रघुवीर राम थे।
English explanation
There were the same childhood, the same beauty, and the same compassionate Rama, hero of Raghu’s lineage.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोइ | वही | the same |
| सिसुपन | बालपन; बाल्यावस्था | childhood; infant state |
| सोइ | वही | the same |
| सोभा | सुंदरता; शोभा | beauty; splendor |
| सोइ | वही | the same |
| कृपाल | कृपालु | compassionate |
| रघुबीर | रघुवंश के वीर राम | Rama, hero of Raghu’s lineage |
2भुवन भुवन देखत फिरउँ प्रेरित मोह समीर॥ ८१ (ख)॥
मोह रूपी हवा से प्रेरित होकर मैं एक-एक भुवन को देखता हुआ घूमता रहा।
English explanation
Driven by the wind of delusion, I kept wandering from world to world, observing each.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भुवन | एक भुवन | one world |
| भुवन | दूसरा भुवन; प्रत्येक भुवन | another world; every world |
| देखत | देखते हुए | observing |
| फिरउँ | मैं घूमता रहा | I kept wandering |
| प्रेरित | प्रेरित; चलाया हुआ | driven; impelled |
| मोह | मोह; भ्रम | delusion |
| समीर | हवा | wind |
| ख | दोहा ८१ का संदर्भ-चिह्न (ख) | reference marker (ख) for verse 81 |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 81 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 7.81
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 983, 984
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।