उत्तरकाण्ड · दोहा 82 (क) · दोहा
देखि कृपाल बिकल मोहि बिहँसे तब रघुबीर।
देखि कृपाल बिकल मोहि बिहँसे तब रघुबीर।
बिहँसतहीं मुख बाहेर आयउँ सुनु मतिधीर॥ ८२ (क)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.82 · पुस्तक पृ. 984, 985
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1देखि कृपाल बिकल मोहि बिहँसे तब रघुबीर।
मुझे व्याकुल देखकर कृपालु रघुवीर तब हँस पड़े।
English explanation
Seeing me distraught, compassionate Rama then laughed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखि | देखकर | having seen |
| कृपाल | कृपालु | compassionate |
| बिकल | व्याकुल | distraught |
| मोहि | मुझे | me |
| बिहँसे | हँस पड़े | laughed |
| तब | तब | then |
| रघुबीर | रघुकुल के वीर श्रीराम | Rama, hero of Raghu’s lineage |
2बिहँसतहीं मुख बाहेर आयउँ सुनु मतिधीर॥ ८२ (क)॥
हे धीरबुद्धि गरुड़, सुनो! उनके हँसते ही मैं उनके मुख से बाहर आ गया।
English explanation
Listen, O steady-minded Garuda! As soon as he laughed, I came out of his mouth.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिहँसतहीं | हँसते ही | as soon as he laughed |
| मुख | उनके मुख से | from his mouth |
| बाहेर | बाहर | out |
| आयउँ | मैं आया | I came |
| सुनु | सुनो | listen |
| मतिधीर | हे धीरबुद्धि गरुड़ | O steady-minded Garuda |
| क | दोहा ८२ के ‘क’ भाग का संदर्भ-चिह्न | reference marker for part (a) of verse 82 |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 82 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 7.82
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 984, 985
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।