उत्तरकाण्ड · दोहा 82 (ख) · दोहा
सोइ लरिकाई मो सन करन लगे पुनि राम।
सोइ लरिकाई मो सन करन लगे पुनि राम।
कोटि भाँति समुझावउँ मनु न लहइ बिश्राम॥ ८२ (ख)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.82 · पुस्तक पृ. 984, 985
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1सोइ लरिकाई मो सन करन लगे पुनि राम।
राम फिर मेरे साथ वही बाल-क्रीड़ा करने लगे।
English explanation
Rama again began the same childhood play with me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोइ | वही | that same |
| लरिकाई | बाल-क्रीड़ा | childhood play |
| मो | मेरे | me |
| सन | साथ | with |
| करन | करने | to do |
| लगे | लगे | began |
| पुनि | फिर | again |
| राम | श्रीराम | Rama |
2कोटि भाँति समुझावउँ मनु न लहइ बिश्राम॥ ८२ (ख)॥
मैं करोड़ों प्रकार से अपने मन को समझाता हूँ, पर मन को शांति नहीं मिलती।
English explanation
I try to reason with my mind in countless ways, but it finds no rest.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कोटि | करोड़ों; असंख्य | countless; literally, ten million |
| भाँति | प्रकार से | in ways |
| समुझावउँ | मैं समझाता हूँ | I reason with |
| मनु | मन | the mind |
| न | नहीं | not |
| लहइ | पाता है | finds |
| बिश्राम | विश्राम; शांति | rest; peace |
| ख | दोहा ८२ के ‘ख’ भाग का संदर्भ-चिह्न | reference marker for part (b) of verse 82 |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 82 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 7.82
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 984, 985
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।