उत्तरकाण्ड · दोहा 83 (क) · दोहा
सुनि सप्रेम मम बानी देखि दीन निज दास।
सुनि सप्रेम मम बानी देखि दीन निज दास।
बचन सुखद गंभीर मृदु बोले रमानिवास॥ ८३ (क)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.83 · पुस्तक पृ. 985, 986
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1सुनि सप्रेम मम बानी देखि दीन निज दास।
एआई-प्रारूप: मेरी प्रेमभरी वाणी सुनकर और अपने सेवक को दीन देखकर...
English explanation
AI draft: Hearing my loving words and seeing his own servant in a humble state...
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| सप्रेम | प्रेम से भरी | filled with love |
| मम | मेरी | my |
| बानी | वाणी | words |
| देखि | देखकर | having seen |
| दीन | दीन, विनम्र | lowly and humble |
| निज | अपने | his own |
| दास | सेवक को | servant |
2बचन सुखद गंभीर मृदु बोले रमानिवास॥ ८३ (क)॥
रमा के निवासस्थान प्रभु राम सुख देने वाले, गंभीर और कोमल वचन बोले।
English explanation
Lord Rama, the abode of Rama (Lakshmi), spoke comforting, profound, and gentle words.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बचन | वचन | words |
| सुखद | सुख देने वाले | comforting |
| गंभीर | गंभीर, गहन | solemn and profound |
| मृदु | कोमल | gentle |
| बोले | बोले | spoke |
| रमानिवास | रमा अर्थात लक्ष्मी के निवासस्थान प्रभु राम | Lord Rama, the abode of Lakshmi |
| क | दोहा ८३ के पहले भाग का संदर्भ-चिह्न | reference marker for the first part of verse 83 |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 83 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 7.83
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 985, 986
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।