उत्तरकाण्ड · दोहा 83 (ख) · दोहा
काकभसुंडि मागु बर अति प्रसन्न मोहि जानि।
काकभसुंडि मागु बर अति प्रसन्न मोहि जानि।
अनिमादिक सिधि अपर रिधि मोच्छ सकल सुख खानि॥ ८३ (ख)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.83 · पुस्तक पृ. 985, 986
भावार्थ और शब्दार्थ
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1काकभसुंडि मागु बर अति प्रसन्न मोहि जानि।
हे काकभसुंडि, मुझे अत्यंत प्रसन्न जानकर वर माँगो।
English explanation
Kakabhushundi, knowing me to be exceedingly pleased, ask for a boon.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| काकभसुंडि | हे काकभसुंडि, कौए के रूप में रामभक्त ऋषि | O Kakabhushundi, the crow-sage devoted to Rama |
| मागु | माँगो | ask for |
| बर | वरदान | a boon |
| अति | अत्यंत | exceedingly |
| प्रसन्न | प्रसन्न | pleased |
| मोहि | मुझे | me |
| जानि | जानकर | knowing |
2अनिमादिक सिधि अपर रिधि मोच्छ सकल सुख खानि॥ ८३ (ख)॥
अणिमा आदि सिद्धियाँ, अन्य समृद्धियाँ अथवा समस्त सुखों की खान मोक्ष माँग लो।
English explanation
Ask for powers such as becoming minute, other forms of prosperity, or liberation, the source of all happiness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अनिमादिक | अणिमा अर्थात अत्यंत सूक्ष्म होने की शक्ति आदि | the power of becoming minute and similar powers |
| सिधि | अलौकिक सिद्धियाँ | supernatural attainments |
| अपर | अन्य | other |
| रिधि | ऋद्धियाँ, समृद्धियाँ | forms of prosperity |
| मोच्छ | मोक्ष, मुक्ति | liberation |
| सकल | समस्त | all |
| सुख | सुखों की | happiness |
| खानि | खान, भंडार | mine or abundant source |
| ख | दोहा ८३ के दूसरे भाग का संदर्भ-चिह्न | reference marker for the second part of verse 83 |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 83 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 7.83
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 985, 986
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।