उत्तरकाण्ड · दोहा 84 (क) · दोहा
अबिरल भगति बिसुद्ध तव श्रुति पुरान जो गाव।
अबिरल भगति बिसुद्ध तव श्रुति पुरान जो गाव।
जेहि खोजत जोगीस मुनि प्रभु प्रसाद कोउ पाव॥ ८४ (क)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.84 · पुस्तक पृ. 986, 986
भावार्थ और शब्दार्थ
1अबिरल भगति बिसुद्ध तव श्रुति पुरान जो गाव।
एआई-प्रारूप अर्थ: आपकी वह अखंड, विशुद्ध भक्ति, जिसका वेद और पुराण गुणगान करते हैं।
English explanation
AI-draft meaning: That uninterrupted, pure devotion to you which the Vedas and Puranas praise.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अबिरल | अखंड; निरंतर | uninterrupted; continuous |
| भगति | भक्ति | devotion |
| बिसुद्ध | विशुद्ध; निर्मल | pure; unsullied |
| तव | आपकी; आपके प्रति | your; directed toward you |
| श्रुति | वेद | the Vedas |
| पुरान | पुराण | the Puranas |
| जो | जिसका | which; whose praise |
| गाव | गुणगान करते हैं | praise; sing of |
2जेहि खोजत जोगीस मुनि प्रभु प्रसाद कोउ पाव॥ ८४ (क)॥
एआई-प्रारूप अर्थ: जिसे श्रेष्ठ योगी और मुनि खोजते हैं, और जिसे, हे प्रभु, आपकी कृपा से कोई विरला पाता है।
English explanation
AI-draft meaning: Which great yogis and sages seek, and which, O Lord, a rare person obtains through your grace.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जेहि | जिस भक्ति को | which devotion |
| खोजत | खोजते हैं | seek |
| जोगीस | श्रेष्ठ योगी | great yogis |
| मुनि | मुनि; मननशील ऋषि | sages |
| प्रभु | हे प्रभु | O Lord |
| प्रसाद | आपकी कृपा से | through your grace |
| कोउ | कोई विरला | a rare person; someone |
| पाव | पाता है | obtains |
| क | दोहा ८४ के पहले भाग का संदर्भ-चिह्न | reference marker for the first part of verse 84 |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 84 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 7.84
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 986, 986
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।