उत्तरकाण्ड · दोहा 84 (ख) · दोहा
भगत कल्पतरु प्रनत हित कृपा सिंधु सुख धाम।
भगत कल्पतरु प्रनत हित कृपा सिंधु सुख धाम।
सोइ निज भगति मोहि प्रभु देहु दया करि राम॥ ८४ (ख)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.84 · पुस्तक पृ. 986, 986
भावार्थ और शब्दार्थ
1भगत कल्पतरु प्रनत हित कृपा सिंधु सुख धाम।
एआई-प्रारूप अर्थ: हे भक्तों के लिए कल्पवृक्ष, शरणागतों के हितकारी, कृपा के सागर और सुख के धाम!
English explanation
AI-draft meaning: O wish-fulfilling tree for devotees, benefactor of those who take refuge, ocean of compassion, and abode of happiness!
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भगत | भक्तों के लिए | for devotees |
| कल्पतरु | मनोरथ पूर्ण करने वाला कल्पवृक्ष | wish-fulfilling tree |
| प्रनत | शरणागतों के | of those who bow or take refuge |
| हित | हितकारी | benefactor |
| कृपा | कृपा का | of compassion |
| सिंधु | सागर | ocean |
| सुख | सुख का | of happiness |
| धाम | धाम; निवास | abode |
2सोइ निज भगति मोहि प्रभु देहु दया करि राम॥ ८४ (ख)॥
एआई-प्रारूप अर्थ: हे प्रभु राम, दया करके मुझे अपने प्रति वही भक्ति दीजिए।
English explanation
AI-draft meaning: O Lord Rama, graciously grant me that very devotion to you.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोइ | वही | that very |
| निज | अपने प्रति | to yourself |
| भगति | भक्ति | devotion |
| मोहि | मुझे | to me |
| प्रभु | हे प्रभु | O Lord |
| देहु | दीजिए | please grant |
| दया | दया | compassion |
| करि | करके | having shown; showing |
| राम | हे राम | O Rama, the Lord addressed |
| ख | दोहा ८४ के दूसरे भाग का संदर्भ-चिह्न | reference marker for the second part of verse 84 |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 84 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 7.84
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 986, 986
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।