उत्तरकाण्ड · दोहा 81 (क) · दोहा
भिन्न भिन्न मैं दीख सबु अति बिचित्र हरिजान।
भिन्न भिन्न मैं दीख सबु अति बिचित्र हरिजान।
अगनित भुवन फिरेउँ प्रभु राम न देखेउँ आन॥ ८१ (क)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.81 · पुस्तक पृ. 983, 984
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1भिन्न भिन्न मैं दीख सबु अति बिचित्र हरिजान।
एआई प्रारूप: हे हरि के भक्त गरुड़! मुझे सब कुछ अलग-अलग और अत्यंत विचित्र दिखाई दिया।
English explanation
AI draft: O Garuda, devotee of Hari! Everything appeared distinct and exceedingly wondrous to me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भिन्न | अलग | distinct |
| भिन्न | अलग | different |
| मैं | मुझे | to me |
| दीख | दिखाई दिया | appeared |
| सबु | सब कुछ | everything |
| अति | अत्यंत | exceedingly |
| बिचित्र | विचित्र; आश्चर्यजनक | varied and wondrous |
| हरिजान | हे हरि के भक्त गरुड़ | O Garuda, devotee of Hari |
2अगनित भुवन फिरेउँ प्रभु राम न देखेउँ आन॥ ८१ (क)॥
मैं असंख्य भुवनों में घूमा, पर प्रभु राम को कहीं भिन्न नहीं देखा।
English explanation
I roamed through countless worlds, but nowhere did I see Lord Rama as different.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अगनित | असंख्य | countless |
| भुवन | लोकों में | through worlds |
| फिरेउँ | मैं घूमा | I roamed |
| प्रभु | स्वामी; भगवान | Lord |
| राम | राम | Rama, the Lord |
| न | नहीं | not |
| देखेउँ | मैंने देखा | I saw |
| आन | भिन्न; दूसरे रूप में | different; otherwise |
| क | दोहा ८१ का संदर्भ-चिह्न (क) | reference marker (क) for verse 81 |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 81 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 7.81
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 983, 984
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।