उत्तरकाण्ड · दोहा 80 (ख) · दोहा
एक एक ब्रह्मांड महुँ रहउँ बरष सत एक।
एक एक ब्रह्मांड महुँ रहउँ बरष सत एक।
एहि बिधि देखत फिरउँ मैं अंड कटाह अनेक॥ ८० (ख)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.8 · पुस्तक पृ. 982, 983
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1एक एक ब्रह्मांड महुँ रहउँ बरष सत एक।
प्रत्येक ब्रह्मांड में मैं एक सौ वर्ष रहा।
English explanation
I stayed in each universe for a hundred years.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एक | एक-एक | each |
| एक | प्रत्येक | every single |
| ब्रह्मांड | ब्रह्मांड | universe |
| महुँ | में | in |
| रहउँ | मैं रहा | I stayed |
| बरष | वर्ष | years |
| सत | सौ | hundred |
| एक | एक | one |
2एहि बिधि देखत फिरउँ मैं अंड कटाह अनेक॥ ८० (ख)॥
इस प्रकार मैं अनेक ब्रह्मांडों के विशाल आवरणों को देखते हुए घूमता रहा।
English explanation
In this way, I roamed, viewing the vast shells of many universes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इस | this |
| बिधि | प्रकार से | way |
| देखत | देखते हुए | while viewing |
| फिरउँ | घूमता रहा | kept roaming |
| मैं | मैं | I |
| अंड | ब्रह्मांड | cosmic egg |
| कटाह | विशाल पात्र-जैसा आवरण | vast bowl-like shell |
| अनेक | अनेक | many |
| ख | पद-संदर्भ चिह्न ‘ख’ | verse reference marker ‘ख’ |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 80 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 7.8
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 982, 983
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