उत्तरकाण्ड · दोहा 80 (क) · दोहा
जो नहिं देखा नहिं सुना जो मनहूँ न समाइ।
जो नहिं देखा नहिं सुना जो मनहूँ न समाइ।
सो सब अद्भुत देखेउँ बरनि कवनि बिधि जाइ॥ ८० (क)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.8 · पुस्तक पृ. 982, 983
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1जो नहिं देखा नहिं सुना जो मनहूँ न समाइ।
जो न कभी देखा था, न सुना था, और जो मन में भी नहीं समा सकता था—
English explanation
What had never been seen or heard, and could not even be conceived in the mind—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जो | जो कुछ | that which |
| नहिं | नहीं | not |
| देखा | देखा था | had been seen |
| नहिं | नहीं | not |
| सुना | सुना था | had been heard |
| जो | जो कुछ | that which |
| मनहूँ | मन में भी | even in the mind |
| न | नहीं | not |
| समाइ | समा सके | could be conceived |
2सो सब अद्भुत देखेउँ बरनि कवनि बिधि जाइ॥ ८० (क)॥
वह सब अद्भुत मैंने देखा; उसका वर्णन किस प्रकार किया जा सकता है?
English explanation
I saw all those wonders; how could they possibly be described?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | वह | that |
| सब | सब कुछ | all |
| अद्भुत | अद्भुत दृश्य | wonders |
| देखेउँ | मैंने देखा | I saw |
| बरनि | वर्णन किया | be described |
| कवनि | किस | what |
| बिधि | प्रकार से | way |
| जाइ | जा सकता है | could it be |
| क | पद-संदर्भ चिह्न ‘क’ | verse reference marker ‘क’ |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 80 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 7.8
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 982, 983
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