उत्तरकाण्ड · दोहा 101 (क) · दोहा
सुनु खगेस कलि कपट हठ दंभ द्वेष पाषंड।
सुनु खगेस कलि कपट हठ दंभ द्वेष पाषंड।
मान मोह मारादि मद ब्यापि रहे ब्रह्मंड॥ १०१ (क)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.101 · पुस्तक पृ. 1003, 1003
भावार्थ और शब्दार्थ
1सुनु खगेस कलि कपट हठ दंभ द्वेष पाषंड।
एआई-निर्मित प्रारूप: हे पक्षिराज गरुड़, सुनो! कलियुग में कपट, हठ, दंभ, द्वेष और पाखंड पूरे ब्रह्मांड में व्याप्त हैं (अगली पंक्ति के साथ)।
English explanation
AI draft: Listen, Garuda, king of birds! In the age of Kali, deceit, obstinacy, pretension, hatred, and religious hypocrisy pervade the universe (continued in the next line).
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनु | सुनो | listen |
| खगेस | हे पक्षिराज गरुड़ | O Garuda, king of birds |
| कलि | कलियुग में | in the age of Kali |
| कपट | छल-कपट | deceit |
| हठ | हठ, दुराग्रह | obstinacy |
| दंभ | दंभ, झूठा दिखावा | pretension |
| द्वेष | द्वेष, वैरभाव | hatred |
| पाषंड | धार्मिक पाखंड | religious hypocrisy |
2मान मोह मारादि मद ब्यापि रहे ब्रह्मंड॥ १०१ (क)॥
अभिमान, मोह, काम आदि और मद भी पूरे ब्रह्मांड में व्याप्त हैं।
English explanation
Pride, delusion, lust and related passions, and arrogance also pervade the entire universe.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मान | अभिमान | pride |
| मोह | मोह, विवेक को ढकने वाला लगाव | delusion and attachment |
| मारादि | काम आदि विकार | lust and related passions |
| मद | मद, अहंकार | arrogance |
| ब्यापि | व्याप्त होकर | pervading |
| रहे | बने हुए हैं | remain |
| ब्रह्मंड | समूचे ब्रह्मांड में | throughout the universe |
| क | पद-संदर्भ का चिह्न (क) | verse reference marker (क) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 101 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 7.101
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिका अपनी पूर्वजन्मकथा और कलिमहिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1003, 1003
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।