उत्तरकाण्ड · दोहा 101 (ख) · दोहा
तामस धर्म करहिं नर जप तप ब्रत मख दान।
तामस धर्म करहिं नर जप तप ब्रत मख दान।
देव न बरषहिं धरनीं बए न जामहिं धान॥ १०१ (ख)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.101 · पुस्तक पृ. 1003, 1003
भावार्थ और शब्दार्थ
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1तामस धर्म करहिं नर जप तप ब्रत मख दान।
मनुष्य तामस भाव से धार्मिक कर्म—जप, तप, व्रत, यज्ञ और दान—करते हैं।
English explanation
People perform religious practices—recitation, austerities, vows, sacrifices, and charity—with a disposition governed by tamas.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तामस | तमोगुण से प्रेरित | governed by tamas, the quality of darkness and ignorance |
| धर्म | धार्मिक कर्म | religious practices |
| करहिं | करते हैं | perform |
| नर | मनुष्य | people |
| जप | मंत्र या नाम का बार-बार उच्चारण | repeated recitation of a mantra or sacred name |
| तप | तपस्या | austerities |
| ब्रत | धार्मिक व्रत | religious vows and observances |
| मख | यज्ञ | sacrificial rites |
| दान | दान देना | charitable giving |
2देव न बरषहिं धरनीं बए न जामहिं धान॥ १०१ (ख)॥
वर्षा के देवता वर्षा नहीं करते, और धरती में बोए हुए अन्न के बीज नहीं अंकुराते।
English explanation
The rain deity sends no rain, and grain sown in the earth does not sprout.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देव | वर्षा के देवता | the rain deity |
| न | नहीं | not |
| बरषहिं | वर्षा करते हैं | send rain |
| धरनीं | धरती में | in the earth |
| बए | बोए हुए | sown |
| न | नहीं | not |
| जामहिं | अंकुराते हैं | sprout |
| धान | अन्न के बीज | grain seeds |
| ख | पद-संदर्भ का चिह्न (ख) | verse reference marker (ख) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 101 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 7.101
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिका अपनी पूर्वजन्मकथा और कलिमहिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1003, 1003
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।