उत्तरकाण्ड · दोहा 102 (क) · दोहा
सुनु ब्यालारि काल कलि मल अवगुन आगार।
सुनु ब्यालारि काल कलि मल अवगुन आगार।
गुनउ बहुत कलिजुग कर बिनु प्रयास निस्तार॥ १०२ (क)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.102 · पुस्तक पृ. 1004, 1005
भावार्थ और शब्दार्थ
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1सुनु ब्यालारि काल कलि मल अवगुन आगार।
हे गरुड़, सुनो! कलियुग का काल मलिनता और अवगुणों का भंडार है।
English explanation
Listen, Garuda! The age of Kali is a storehouse of impurity and faults.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनु | सुनो | listen |
| ब्यालारि | हे सर्पों के शत्रु गरुड़ | O Garuda, enemy of serpents |
| काल | समय; युग | time; age |
| कलि | कलियुग | the age of Kali |
| मल | मलिनता; पाप | impurity; sin |
| अवगुन | दोष; दुर्गुण | faults; vices |
| आगार | भंडार; घर | storehouse; abode |
2गुनउ बहुत कलिजुग कर बिनु प्रयास निस्तार॥ १०२ (क)॥
फिर भी कलियुग का एक बहुत बड़ा गुण है: बिना कठिन प्रयास के भवबंधन से मुक्ति मिलती है।
English explanation
Yet the age of Kali has a very great merit: liberation from worldly bondage is attainable without arduous effort.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गुनउ | गुण भी | a merit too |
| बहुत | बहुत बड़ा | very great |
| कलिजुग | कलियुग | the age of Kali |
| कर | का | of |
| बिनु | बिना | without |
| प्रयास | प्रयत्न; साधना का श्रम | effort; arduous spiritual practice |
| निस्तार | भवबंधन से मुक्ति | liberation from worldly bondage |
| क | दोहा १०२ का संदर्भ-चिह्न ‘क’ | reference marker ‘क’ for verse 102 |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 102 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 7.102
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिका अपनी पूर्वजन्मकथा और कलिमहिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1004, 1005
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