उत्तरकाण्ड · दोहा 102 (ख) · दोहा
कृतजुग त्रेताँ द्वापर पूजा मख अरु जोग।
कृतजुग त्रेताँ द्वापर पूजा मख अरु जोग।
जो गति होइ सो कलि हरि नाम ते पावहिं लोग॥ १०२ (ख)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.102 · पुस्तक पृ. 1004, 1005
भावार्थ और शब्दार्थ
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1कृतजुग त्रेताँ द्वापर पूजा मख अरु जोग।
सत्ययुग, त्रेता और द्वापर में पूजा, यज्ञ और योग से—
English explanation
In the ages of Krita, Treta, and Dvapara, through worship, sacrifice, and yoga—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कृतजुग | कृतयुग अर्थात सत्ययुग में | in Krita Yuga, the first age |
| त्रेताँ | त्रेतायुग में | in Treta Yuga, the second age |
| द्वापर | द्वापरयुग में | in Dvapara Yuga, the third age |
| पूजा | उपासना; पूजन | worship |
| मख | यज्ञ | ritual sacrifice |
| अरु | और | and |
| जोग | योग-साधना | yogic practice |
2जो गति होइ सो कलि हरि नाम ते पावहिं लोग॥ १०२ (ख)॥
जो परम गति उन साधनों से मिलती है, वही लोग कलियुग में हरि के नाम से प्राप्त करते हैं।
English explanation
The spiritual liberation attained through those practices is attained by people in the age of Kali through Hari’s name.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जो | जो | which |
| गति | परम गति; मुक्ति | spiritual liberation |
| होइ | मिलती है; होती है | is attained |
| सो | वही | that same |
| कलि | कलियुग में | in the age of Kali |
| हरि | भगवान हरि का | of Lord Hari |
| नाम | नाम | name |
| ते | से; के द्वारा | through; by means of |
| पावहिं | प्राप्त करते हैं | attain |
| लोग | लोग; मनुष्य | people |
| ख | दोहा १०२ का संदर्भ-चिह्न ‘ख’ | reference marker ‘ख’ for verse 102 |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 102 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 7.102
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिका अपनी पूर्वजन्मकथा और कलिमहिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1004, 1005
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