उत्तरकाण्ड · दोहा 103 (क) · दोहा
कलिजुग सम जुग आन नहिं जौं नर कर बिस्वास।
कलिजुग सम जुग आन नहिं जौं नर कर बिस्वास।
गाइ राम गुन गन बिमल भव तर बिनहिं प्रयास॥ १०३ (क)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.103 · पुस्तक पृ. 1005, 1006
भावार्थ और शब्दार्थ
1कलिजुग सम जुग आन नहिं जौं नर कर बिस्वास।
एआई द्वारा तैयार अर्थ: यदि मनुष्य विश्वास करे, तो कलियुग के समान दूसरा युग नहीं है।
English explanation
AI-drafted meaning: If a person has faith, no other age equals the age of Kali.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कलिजुग | कलियुग | the age of Kali |
| सम | के समान | equal to |
| जुग | युग | age |
| आन | दूसरा | another |
| नहिं | नहीं है | there is none |
| जौं | यदि | if |
| नर | मनुष्य | a person |
| कर | करे | has |
| बिस्वास | विश्वास | faith |
2गाइ राम गुन गन बिमल भव तर बिनहिं प्रयास॥ १०३ (क)॥
एआई द्वारा तैयार अर्थ: राम के निर्मल गुणों का गान करके मनुष्य बिना प्रयास के संसार-सागर से पार हो जाता है।
English explanation
AI-drafted meaning: By singing Rama’s pure virtues, a person crosses the ocean of worldly existence without effort.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गाइ | गाकर | by singing |
| राम | भगवान राम के | of Lord Rama |
| गुन | गुण | virtues |
| गन | समूह | multitude |
| बिमल | निर्मल | pure |
| भव | संसार-सागर | the ocean of worldly existence |
| तर | पार हो जाता है | crosses beyond |
| बिनहिं | बिना ही | without any |
| प्रयास | प्रयास | effort |
| क | दोहा १०३ का संदर्भ-चिह्न (क) | reference marker (a) for couplet 103 |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 103 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 7.103
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिका अपनी पूर्वजन्मकथा और कलिमहिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1005, 1006
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।