उत्तरकाण्ड · दोहा 124 (ख) · दोहा
सुनि भुसुंडि के बचन सुभ देखि राम पद नेह।
सुनि भुसुंडि के बचन सुभ देखि राम पद नेह।
बोलेउ प्रेम सहित गिरा गरुड़ बिगत संदेह॥ १२४ (ख) ॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.124 · पुस्तक पृ. 1039, 1039
भावार्थ और शब्दार्थ
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1सुनि भुसुंडि के बचन सुभ देखि राम पद नेह।
काकभुशुंडि के शुभ वचन सुनकर और श्रीराम के चरणों में उनका प्रेम देखकर—
English explanation
Having heard Kakabhushundi’s auspicious words and seen his love for Rama’s feet—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| भुसुंडि | काकभुशुंडि, रामभक्त कथावाचक | Kakabhushundi, the devotee and narrator of Rama’s story |
| के | के | of; belonging to |
| बचन | वचन | words; utterances |
| सुभ | शुभ; मंगलमय | auspicious; wholesome |
| देखि | देखकर | having seen |
| राम | श्रीराम | Lord Rama |
| पद | चरणों में | for the feet of |
| नेह | प्रेम | love; affection |
2बोलेउ प्रेम सहित गिरा गरुड़ बिगत संदेह॥ १२४ (ख) ॥
गरुड़, जिनके संदेह दूर हो गए थे, प्रेमभरी वाणी में बोले।
English explanation
Garuda, whose doubts had vanished, spoke in words filled with love.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बोलेउ | बोले | spoke |
| प्रेम | प्रेम | love |
| सहित | से युक्त | filled with |
| गिरा | वाणी में | in speech; in words |
| गरुड़ | गरुड़, विष्णु के पक्षीराज वाहन | Garuda, the king of birds and Vishnu’s mount |
| बिगत | दूर हुए | departed; vanished |
| संदेह | संदेह | doubt |
| ख | पद-संदर्भ का चिह्न ‘ख’ | verse reference marker ‘ख’ |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 124 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 7.124
- सहायक विषय
- रामायण-माहात्म्य, तुलसी-विनय और फलस्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 1039, 1039
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