उत्तरकाण्ड · दोहा 124 (क) · दोहा
जासु नाम भव भेषज हरन घोर त्रय सूल।
जासु नाम भव भेषज हरन घोर त्रय सूल।
सो कृपाल मोहि तो पर सदा रहउ अनुकूल॥ १२४ (क)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.124 · पुस्तक पृ. 1039, 1039
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1जासु नाम भव भेषज हरन घोर त्रय सूल।
एआई प्रारूप: जिनका नाम संसाररूपी रोग की औषधि है और तीनों प्रकार की भीषण पीड़ाओं को दूर करता है।
English explanation
AI draft: His name is medicine for the affliction of worldly existence and removes the three kinds of terrible suffering.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जासु | जिनका | whose |
| नाम | नाम | name |
| भव | संसारजन्य जन्म-मरण का रोग | the affliction of worldly existence |
| भेषज | औषधि | medicine; remedy |
| हरन | दूर करने वाला | removing; taking away |
| घोर | भीषण | terrible; severe |
| त्रय | तीन प्रकार के | three kinds of |
| सूल | पीड़ाएँ | pains; afflictions |
2सो कृपाल मोहि तो पर सदा रहउ अनुकूल॥ १२४ (क)॥
वे कृपालु श्रीराम मुझ पर और तुम पर सदा अनुकूल रहें।
English explanation
May that compassionate Rama always remain gracious toward me and you.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | वे ही | that same one |
| कृपाल | कृपालु प्रभु | compassionate Lord |
| मोहि | मुझ | me |
| तो | तुम | you |
| पर | पर; के प्रति | toward; upon |
| सदा | सदैव | always |
| रहउ | रहें | may remain |
| अनुकूल | अनुग्रहशील; अनुकूल | gracious; favorably disposed |
| क | पद-संदर्भ का चिह्न ‘क’ | verse reference marker ‘क’ |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 124 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 7.124
- सहायक विषय
- रामायण-माहात्म्य, तुलसी-विनय और फलस्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 1039, 1039
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