उत्तरकाण्ड · दोहा 11 (क) · दोहा
सासुन्ह सादर जानकिहि मज्जन तुरत कराइ।
सासुन्ह सादर जानकिहि मज्जन तुरत कराइ।
दिब्य बसन बर भूषन अँग अँग सजे बनाइ॥ ११ (क)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.11 · पुस्तक पृ. 918, 918
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1सासुन्ह सादर जानकिहि मज्जन तुरत कराइ।
एआई प्रारूप: सासुओं ने आदरपूर्वक जानकी को तुरंत स्नान कराया।
English explanation
AI draft: The mothers-in-law respectfully had Janaki bathed at once.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सासुन्ह | सासुओं ने | the mothers-in-law |
| सादर | आदरपूर्वक | respectfully |
| जानकिहि | जानकी को | Janaki, Sita |
| मज्जन | स्नान | bathing |
| तुरत | तुरंत | at once |
| कराइ | कराकर | having had performed |
2दिब्य बसन बर भूषन अँग अँग सजे बनाइ॥ ११ (क)॥
एआई प्रारूप: उन्होंने दिव्य वस्त्रों और उत्तम आभूषणों से जानकी के प्रत्येक अंग को सँवारकर सजाया।
English explanation
AI draft: They carefully adorned every limb of Janaki with divine garments and fine ornaments.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दिब्य | दिव्य | divine |
| बसन | वस्त्र | garments |
| बर | उत्तम | fine |
| भूषन | आभूषण | ornaments |
| अँग | अंग | limb |
| अँग | प्रत्येक अंग | each limb |
| सजे | सजाए | adorned |
| बनाइ | सँवारकर | arranging carefully |
| क | संदर्भ-चिह्न (क) | reference marker (ka) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 11 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 7.11
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका स्वागत, भरत-मिलाप, सबका मिलनानन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 918, 918
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।