उत्तरकाण्ड · दोहा 63 (ख) · दोहा
सदा कृतारथ रूप तुम्ह कह मृदु बचन खगेस।
सदा कृतारथ रूप तुम्ह कह मृदु बचन खगेस।
जेहि कै अस्तुति सादर निज मुख कीन्हि महेस॥ ६३ (ख)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.63 · पुस्तक पृ. 967, 967
भावार्थ और शब्दार्थ
1सदा कृतारथ रूप तुम्ह कह मृदु बचन खगेस।
एआई-प्रारूप अर्थ: पक्षिराज गरुड़ ने कोमल वचन कहे: आप तो सदा ही कृतार्थ स्वरूप हैं।
English explanation
AI-draft meaning: Garuda, king of birds, spoke gentle words: You are ever the very embodiment of fulfillment.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सदा | सदा | always |
| कृतारथ | कृतार्थ; पूर्ण सिद्धि प्राप्त | fulfilled; fully accomplished |
| रूप | स्वरूप | embodiment |
| तुम्ह | आप; काकभुशुण्डि | you; Kakabhushundi |
| कह | कहा; बोले | said; spoke |
| मृदु | कोमल | gentle |
| बचन | वचन | words |
| खगेस | पक्षिराज गरुड़ | Garuda, king of birds |
2जेहि कै अस्तुति सादर निज मुख कीन्हि महेस॥ ६३ (ख)॥
एआई-प्रारूप अर्थ: जिनकी स्तुति महेश अर्थात शिव ने स्वयं अपने मुख से आदरपूर्वक की है।
English explanation
AI-draft meaning: Whose praises Mahesha—Shiva—himself respectfully spoke with his own mouth.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जेहि | जिनकी; काकभुशुण्डि की | whom; referring to Kakabhushundi |
| कै | की; संबंधसूचक | of; possessive particle |
| अस्तुति | स्तुति; प्रशंसा | praise |
| सादर | आदरपूर्वक | respectfully |
| निज | अपने ही | his own |
| मुख | मुख से | with his mouth |
| कीन्हि | की | performed; offered |
| महेस | महेश; भगवान शिव | Mahesha; Shiva |
| ख | दोहा ६३ का खंड-सूचक ‘ख’ | reference marker for part (b) of doha 63 |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 63 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 7.63
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 967, 967
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।