उत्तरकाण्ड · दोहा 64 · दोहा
बालचरित कहि बिबिधि बिधि मन महँ परम उछाह।
बालचरित कहि बिबिधि बिधि मन महँ परम उछाह।
रिषि आगवन कहेसि पुनि श्रीरघुबीर बिबाह॥ ६४॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.64 · पुस्तक पृ. 968, 968
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1बालचरित कहि बिबिधि बिधि मन महँ परम उछाह।
एआई-प्रारूप: मन में अत्यंत उत्साह के साथ बाललीलाओं का विविध प्रकार से वर्णन किया।
English explanation
AI draft: With great enthusiasm in his heart, he narrated the childhood deeds in various ways.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बालचरित | बाल्यकाल की लीलाएँ | childhood deeds |
| कहि | कहकर; वर्णन करके | having narrated |
| बिबिधि | विविध; अनेक प्रकार की | various |
| बिधि | रीति; प्रकार से | ways; manner |
| मन | मन; हृदय | mind; heart |
| महँ | में | in |
| परम | अत्यंत; बहुत अधिक | great; utmost |
| उछाह | उत्साह; उल्लास | enthusiasm; joy |
2रिषि आगवन कहेसि पुनि श्रीरघुबीर बिबाह॥ ६४॥
एआई-प्रारूप: फिर उसने ऋषि विश्वामित्र के आगमन और श्रीराम के विवाह का वर्णन किया।
English explanation
AI draft: Then he narrated the arrival of the sage Vishvamitra and the marriage of Shri Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रिषि | ऋषि विश्वामित्र | the sage Vishvamitra |
| आगवन | आगमन; आना | arrival; coming |
| कहेसि | उसने कहा; वर्णन किया | he narrated |
| पुनि | फिर; उसके बाद | then; afterward |
| श्रीरघुबीर | श्रीराम, रघुवंश के वीर | Shri Rama, hero of Raghu’s lineage |
| बिबाह | विवाह | marriage |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 64
- स्रोत अभिलेख
- 7.64
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 968, 968
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