उत्तरकाण्ड · दोहा 65 · दोहा
कहि बिराध बध जेहि बिधि देह तजी सरभंग।
कहि बिराध बध जेहि बिधि देह तजी सरभंग।
बरनि सुतीछन प्रीति पुनि प्रभु अगस्ति सतसंग॥ ६५॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.65 · पुस्तक पृ. 969, 969
भावार्थ और शब्दार्थ
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1कहि बिराध बध जेहि बिधि देह तजी सरभंग।
विराध के वध और जिस प्रकार शरभंग मुनि ने देह त्यागी, उसका वर्णन करके…
English explanation
Having recounted Viradha’s slaying and how the sage Sharabhanga relinquished his body…
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहि | कहकर; वर्णन करके | having recounted |
| बिराध | विराध नामक राक्षस का | of the demon Viradha |
| बध | वध | slaying |
| जेहि | जिस | in which |
| बिधि | प्रकार | manner |
| देह | शरीर | body |
| तजी | त्याग दिया | relinquished |
| सरभंग | शरभंग मुनि ने | the sage Sharabhanga |
2बरनि सुतीछन प्रीति पुनि प्रभु अगस्ति सतसंग॥ ६५॥
फिर सुतीक्ष्ण मुनि की प्रीति और प्रभु राम का अगस्त्य मुनि के साथ सत्संग वर्णित करके…
English explanation
Then, having described the sage Sutikshna’s love and Lord Rama’s holy fellowship with the sage Agastya…
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बरनि | वर्णन करके | having described |
| सुतीछन | सुतीक्ष्ण मुनि की | of the sage Sutikshna |
| प्रीति | प्रेम; भक्ति-भरी प्रीति | love; loving devotion |
| पुनि | फिर | then |
| प्रभु | प्रभु राम का | of Lord Rama |
| अगस्ति | अगस्त्य मुनि के साथ | with the sage Agastya |
| सतसंग | संत-संगति; पवित्र संग | holy fellowship |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 65
- स्रोत अभिलेख
- 7.65
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 969, 969
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