उत्तरकाण्ड · दोहा 66 (क) · दोहा
प्रभु नारद संबाद कहि मारुति मिलन प्रसंग।
प्रभु नारद संबाद कहि मारुति मिलन प्रसंग।
पुनि सुग्रीव मिताई बालि प्रान कर भंग॥ ६६ (क)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.66 · पुस्तक पृ. 969, 970
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1प्रभु नारद संबाद कहि मारुति मिलन प्रसंग।
AI प्रारूप: प्रभु राम और नारद का संवाद कहकर, फिर हनुमान से मिलन का प्रसंग कहा।
English explanation
AI draft: After recounting the dialogue between Lord Rama and Narada, the episode of meeting Hanuman was narrated.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| नारद | देवर्षि नारद | Narada, the divine sage |
| संबाद | संवाद; बातचीत | dialogue; conversation |
| कहि | कहकर; वर्णन करके | having recounted |
| मारुति | पवनपुत्र हनुमान | Hanuman, son of the wind god |
| मिलन | भेंट; मिलना | meeting |
| प्रसंग | प्रसंग; घटना का वर्णन | episode; account |
2पुनि सुग्रीव मिताई बालि प्रान कर भंग॥ ६६ (क)॥
फिर सुग्रीव से मित्रता और बालि के प्राणों के अंत का प्रसंग कहा।
English explanation
Then came the account of friendship with Sugriva and the ending of Bali’s life.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर; इसके बाद | then; afterward |
| सुग्रीव | वानर सुग्रीव से | with Sugriva, the vanara |
| मिताई | मित्रता | friendship |
| बालि | सुग्रीव के भाई बालि के | of Bali, Sugriva’s brother |
| प्रान | प्राण; जीवन | life; vital breath |
| कर | का | of |
| भंग | अंत; नाश | ending; destruction |
| क | पद-संदर्भ का चिह्न (क) | verse-reference marker (क) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 66 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 7.66
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 969, 970
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।