उत्तरकाण्ड · दोहा 63 (क) · दोहा
नाथ कृतारथ भयउँ मैं तव दरसन खगराज।
नाथ कृतारथ भयउँ मैं तव दरसन खगराज।
आयसु देहु सो करौं अब प्रभु आयहु केहि काज॥ ६३ (क)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.63 · पुस्तक पृ. 967, 967
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1नाथ कृतारथ भयउँ मैं तव दरसन खगराज।
एआई-प्रारूप अर्थ: हे नाथ, हे पक्षिराज गरुड़! आपके दर्शन से मैं कृतार्थ हो गया।
English explanation
AI-draft meaning: O lord, Garuda, king of birds! Seeing you has fulfilled me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाथ | हे स्वामी | O lord |
| कृतारथ | कृतार्थ; जिसका प्रयोजन सफल हुआ | fulfilled; having attained one's purpose |
| भयउँ | हो गया हूँ | have become |
| मैं | मैं | I |
| तव | आपके | your |
| दरसन | दर्शन से | through seeing you |
| खगराज | हे पक्षिराज गरुड़ | O Garuda, king of birds |
2आयसु देहु सो करौं अब प्रभु आयहु केहि काज॥ ६३ (क)॥
एआई-प्रारूप अर्थ: आज्ञा दीजिए, अब मैं वही करूँ। हे प्रभु, आप किस प्रयोजन से आए हैं?
English explanation
AI-draft meaning: Give me your command; I shall now carry it out. O lord, for what purpose have you come?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आयसु | आज्ञा | command |
| देहु | दीजिए | please give |
| सो | वही; जो आज्ञा दें | that; whatever you command |
| करौं | मैं करूँ | I shall do |
| अब | अब | now |
| प्रभु | हे स्वामी | O lord |
| आयहु | आप आए हैं | you have come |
| केहि | किस | what |
| काज | प्रयोजन से | for a purpose |
| क | दोहा ६३ का खंड-सूचक ‘क’ | reference marker for part (a) of doha 63 |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 63 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 7.63
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 967, 967
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।