उत्तरकाण्ड · दोहा 33 · दोहा
संत संग अपबर्ग कर कामी भव कर पंथ।
संत संग अपबर्ग कर कामी भव कर पंथ।
कहहिं संत कबि कोबिद श्रुति पुरान सदग्रंथ॥ ३३॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.33 · पुस्तक पृ. 941, 942
भावार्थ और शब्दार्थ
1संत संग अपबर्ग कर कामी भव कर पंथ।
संतों का संग मोक्ष का मार्ग है और कामासक्त लोगों का संग संसार-बंधन का मार्ग है। (एआई-निर्मित अर्थ-प्रारूप)
English explanation
Association with saints is the path to liberation, while association with those ruled by desire is the path to worldly bondage. (AI-generated interpretive draft)
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| संत | संतों का | of saints |
| संग | संग; संगति | association; company |
| अपबर्ग | मोक्ष; संसार-बंधन से मुक्ति | liberation from worldly bondage |
| कर | का | of; leading to |
| कामी | कामनाओं में आसक्त लोगों की संगति | association with people ruled by desire |
| भव | संसार-बंधन; जन्म-मरण का चक्र | worldly bondage; the cycle of birth and death |
| कर | का | of; leading to |
| पंथ | मार्ग | path |
2कहहिं संत कबि कोबिद श्रुति पुरान सदग्रंथ॥ ३३॥
संत, कवि, विद्वान, वेद, पुराण और सद्ग्रंथ ऐसा कहते हैं।
English explanation
Saints, poets, learned people, the Vedas, the Puranas, and worthy scriptures all say this.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहहिं | कहते हैं | say; declare |
| संत | संतजन | saints |
| कबि | कवि | poets |
| कोबिद | विद्वान; जानकार | learned people; those versed in knowledge |
| श्रुति | वेद | the Vedas |
| पुरान | पुराण | the Puranas |
| सदग्रंथ | उत्तम और प्रामाणिक ग्रंथ | worthy and sound scriptures |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 33
- स्रोत अभिलेख
- 7.33
- सहायक विषय
- पुत्रोत्पत्ति, अयोध्याजीकी रमणीयता, सनकादिका आगमन और संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 941, 942
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।