उत्तरकाण्ड · दोहा 32 · दोहा
देखि राम मुनि आवत हरषि दंडवत कीन्ह।
देखि राम मुनि आवत हरषि दंडवत कीन्ह।
स्वागत पूँछि पीत पट प्रभु बैठन कहँ दीन्ह॥ ३२॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.32 · पुस्तक पृ. 941, 941
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1देखि राम मुनि आवत हरषि दंडवत कीन्ह।
एआई-प्रारूप: मुनि को आते देखकर राम ने हर्षित होकर दंडवत प्रणाम किया।
English explanation
AI draft: Seeing the sage approaching, Rama joyfully prostrated himself in greeting.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखि | देखकर | having seen |
| राम | राम ने | Rama, the subject |
| मुनि | मुनि को | the sage |
| आवत | आते हुए | approaching |
| हरषि | हर्षित होकर | with joy |
| दंडवत | भूमि पर पूरा शरीर झुकाकर प्रणाम | full-body prostration |
| कीन्ह | किया | performed |
2स्वागत पूँछि पीत पट प्रभु बैठन कहँ दीन्ह॥ ३२॥
एआई-प्रारूप: स्वागत करके और कुशल पूछकर प्रभु ने मुनि को बैठने के लिए पीला वस्त्र दिया।
English explanation
AI draft: After welcoming the sage and asking after his well-being, the Lord gave him a yellow cloth to sit on.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| स्वागत | स्वागत करके | having welcomed him |
| पूँछि | कुशल पूछकर | having asked after his well-being |
| पीत | पीला | yellow |
| पट | वस्त्र | cloth |
| प्रभु | प्रभु राम ने | Lord Rama |
| बैठन | बैठने | sitting |
| कहँ | के लिए | for |
| दीन्ह | दिया | gave |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 32
- स्रोत अभिलेख
- 7.32
- सहायक विषय
- पुत्रोत्पत्ति, अयोध्याजीकी रमणीयता, सनकादिका आगमन और संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 941, 941
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