उत्तरकाण्ड · दोहा 69 (ख) · दोहा
श्रोता सुमति सुसील सुचि कथा रसिक हरिदास।
श्रोता सुमति सुसील सुचि कथा रसिक हरिदास।
पाइ उमा अति गोप्यमपि सज्जन करहिं प्रकास॥ ६९ (ख)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.69 · पुस्तक पृ. 972, 973
भावार्थ और शब्दार्थ
1श्रोता सुमति सुसील सुचि कथा रसिक हरिदास।
जब सुनने वाला सद्बुद्धि वाला, सुशील, पवित्र, कथा का रस लेने वाला और हरि का भक्त हो—
English explanation
When the listener is discerning, good-natured, pure, appreciative of the sacred narrative, and devoted to Hari—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| श्रोता | सुनने वाला | listener |
| सुमति | सद्बुद्धि वाला | discerning |
| सुसील | अच्छे स्वभाव वाला | good-natured |
| सुचि | पवित्र | pure |
| कथा | भगवान की कथा | sacred narrative |
| रसिक | रस लेने वाला | one who appreciates its savor |
| हरिदास | हरि का सेवक या भक्त | servant or devotee of Hari |
2पाइ उमा अति गोप्यमपि सज्जन करहिं प्रकास॥ ६९ (ख)॥
हे उमा, ऐसा श्रोता पाकर सज्जन अत्यंत गोपनीय बात भी प्रकट कर देते हैं।
English explanation
O Uma, on finding such a listener, good people reveal even what is most confidential.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पाइ | पाकर | having found |
| उमा | हे उमा, पार्वती | O Uma, Parvati |
| अति | अत्यंत | extremely |
| गोप्यमपि | गोपनीय बात भी | even what is confidential |
| सज्जन | सदाचारी लोग | good people |
| करहिं | करते हैं | do |
| प्रकास | प्रकट | known |
| ख | दोहा ६९ के दूसरे भाग का संदर्भ-चिह्न | reference marker for the second part of couplet 69 |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 69 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 7.69
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 972, 973
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।