उत्तरकाण्ड · दोहा 70 (क) · दोहा
ग्यानी तापस सूर कबि कोबिद गुन आगार।
ग्यानी तापस सूर कबि कोबिद गुन आगार।
केहि कै लोभ बिडंबना कीन्हि न एहिं संसार॥ ७० (क)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.7 · पुस्तक पृ. 973, 973
भावार्थ और शब्दार्थ
1ग्यानी तापस सूर कबि कोबिद गुन आगार।
एआई-प्रारूप: ज्ञानी, तपस्वी, वीर, कवि, विद्वान और गुणों के भंडार—इनमें भी कौन लोभ से बचा है? (प्रश्न अगली पंक्ति में पूरा होता है।)
English explanation
AI draft: The wise, ascetics, heroes, poets, learned people, and repositories of virtue—which of these has escaped greed? (The question continues in the next line.)
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ग्यानी | ज्ञानी व्यक्ति | wise people |
| तापस | तपस्वी | ascetics |
| सूर | वीर | heroes |
| कबि | कवि | poets |
| कोबिद | विद्वान | learned people |
| गुन | गुणों के | of virtues |
| आगार | भंडार | repositories |
2केहि कै लोभ बिडंबना कीन्हि न एहिं संसार॥ ७० (क)॥
एआई-प्रारूप: इस संसार में लोभ ने किसकी दुर्दशा नहीं की—चाहे वह ज्ञानी, तपस्वी, वीर, कवि, विद्वान या गुणों का भंडार हो?
English explanation
AI draft: Whom in this world has greed not brought to disgrace—even among the wise, ascetics, heroes, poets, scholars, and repositories of virtue?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| केहि | किसकी | whose |
| कै | की | possessive marker |
| लोभ | लोभ ने | greed |
| बिडंबना | दुर्दशा; अपमानजनक दशा | disgrace; humiliation |
| कीन्हि | की | caused |
| न | नहीं | not |
| एहिं | इस | this |
| संसार | संसार में | in the world |
| क | दोहा ७० के पहले भाग का संदर्भ-चिह्न | reference marker for the first part of couplet 70 |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 70 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 7.7
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 973, 973
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।