उत्तरकाण्ड · दोहा 70 (ख) · दोहा
श्री मद बक्र न कीन्ह केहि प्रभुता बधिर न काहि।
श्री मद बक्र न कीन्ह केहि प्रभुता बधिर न काहि।
मृगलोचनि के नैन सर को अस लाग न जाहि॥ ७० (ख)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.7 · पुस्तक पृ. 973, 973
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1श्री मद बक्र न कीन्ह केहि प्रभुता बधिर न काहि।
एआई-प्रारूप: धन-संपत्ति के घमंड ने किसे टेढ़ा नहीं किया और प्रभुता ने किसे बहरा नहीं बनाया?
English explanation
AI draft: Whom has the pride of wealth not made crooked, and whom has power not made deaf?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| श्री | धन-संपत्ति का | of wealth and prosperity |
| मद | घमंड | pride |
| बक्र | टेढ़ा; कुटिल | crooked; perverse |
| न | नहीं | not |
| कीन्ह | बनाया | made |
| केहि | किसे | whom |
| प्रभुता | प्रभुत्व; अधिकार की शक्ति | power; authority |
| बधिर | बहरा | deaf |
| न | नहीं | not |
| काहि | किसे | whom |
2मृगलोचनि के नैन सर को अस लाग न जाहि॥ ७० (ख)॥
एआई-प्रारूप: ऐसा कौन है जिसे मृगनयनी स्त्री के नेत्रों के बाण न लग जाएँ?
English explanation
AI draft: Who is there whom the arrows of a doe-eyed woman's eyes do not strike?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मृगलोचनि | मृग के समान आँखों वाली स्त्री | a doe-eyed woman |
| के | के | of |
| नैन | नेत्रों के | of the eyes |
| सर | बाण | arrows |
| को | कौन | who |
| अस | ऐसा | such |
| लाग | लग | strike |
| न | नहीं | not |
| जाहि | जाएँ | come to strike |
| ख | दोहा ७० के दूसरे भाग का संदर्भ-चिह्न | reference marker for the second part of couplet 70 |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 70 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 7.7
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 973, 973
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।