उत्तरकाण्ड · दोहा 71 (क) · दोहा
ब्यापि रहेउ संसार महुँ माया कटक प्रचंड।
ब्यापि रहेउ संसार महुँ माया कटक प्रचंड।
सेनापति कामादि भट दंभ कपट पाषंड॥ ७१ (क)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.71 · पुस्तक पृ. 974, 974
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1ब्यापि रहेउ संसार महुँ माया कटक प्रचंड।
एआई-प्रारूप अर्थ: माया की प्रचंड सेना संसार में व्याप्त है।
English explanation
AI-draft interpretation: Maya’s formidable army pervades the world.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ब्यापि | व्याप्त होकर | pervading |
| रहेउ | रही है | remains |
| संसार | संसार | the world |
| महुँ | में | in |
| माया | माया की | of Maya, the power of illusion |
| कटक | सेना | army |
| प्रचंड | अत्यंत प्रबल | formidable |
2सेनापति कामादि भट दंभ कपट पाषंड॥ ७१ (क)॥
काम आदि उसके सेनापति हैं; दंभ, कपट और पाखंड उसके योद्धा हैं।
English explanation
Desire and the other passions are its commanders; pretension, deceit, and religious hypocrisy are its warriors.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सेनापति | सेना के प्रधान | commanders |
| कामादि | काम आदि विकार | desire and other passions |
| भट | योद्धा | warriors |
| दंभ | दिखावटी बड़प्पन | pretension |
| कपट | छल | deceit |
| पाषंड | धार्मिक पाखंड | religious hypocrisy |
| क | दोहा ७१ के पहले भाग का संदर्भ-चिह्न | reference marker for the first part of verse 71 |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 71 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 7.71
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 974, 974
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।