उत्तरकाण्ड · दोहा 69 (क) · दोहा
सुनि बिहंगपति बानी सहित बिनय अनुराग।
सुनि बिहंगपति बानी सहित बिनय अनुराग।
पुलक गात लोचन सजल मन हरषेउ अति काग॥ ६९ (क)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.69 · पुस्तक पृ. 972, 973
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1सुनि बिहंगपति बानी सहित बिनय अनुराग।
पक्षियों के स्वामी गरुड़ की विनय और प्रेम से भरी वाणी सुनकर—
English explanation
Hearing the words of Garuda, lord of birds, filled with humility and affection—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| बिहंगपति | पक्षियों के स्वामी गरुड़ | Garuda, lord of birds |
| बानी | वाणी | words |
| सहित | से युक्त | filled with |
| बिनय | विनम्रता | humility |
| अनुराग | प्रेम | affection |
2पुलक गात लोचन सजल मन हरषेउ अति काग॥ ६९ (क)॥
काकभुशुण्डि का शरीर रोमांचित हो गया, आँखें आँसुओं से भर गईं और मन अत्यंत प्रसन्न हुआ।
English explanation
Kakabhushundi’s body thrilled with goosebumps, his eyes filled with tears, and his heart rejoiced greatly.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुलक | रोमांचित | thrilled with goosebumps |
| गात | शरीर | body |
| लोचन | आँखें | eyes |
| सजल | आँसुओं से भरी | filled with tears |
| मन | मन | heart |
| हरषेउ | प्रसन्न हुआ | rejoiced |
| अति | अत्यंत | greatly |
| काग | कौए के रूप में काकभुशुण्डि | Kakabhushundi, the crow sage |
| क | दोहा ६९ के पहले भाग का संदर्भ-चिह्न | reference marker for the first part of couplet 69 |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 69 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 7.69
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 972, 973
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।