उत्तरकाण्ड · दोहा 7 · दोहा
लछिमन अरु सीता सहित प्रभुहि बिलोकति मातु।
लछिमन अरु सीता सहित प्रभुहि बिलोकति मातु।
परमानंद मगन मन पुनि पुनि पुलकित गातु॥ ७॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.7 · पुस्तक पृ. 914, 915
भावार्थ और शब्दार्थ
1लछिमन अरु सीता सहित प्रभुहि बिलोकति मातु।
एआई-निर्मित अर्थ-प्रारूप: माता लक्ष्मण और सीता सहित प्रभु राम को निहार रही हैं।
English explanation
AI-generated draft meaning: The mother gazes upon Lord Rama together with Lakshmana and Sita.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लछिमन | लक्ष्मण, राम के छोटे भाई | Lakshmana, Rama’s younger brother |
| अरु | और | and |
| सीता | सीता, राम की पत्नी | Sita, Rama’s wife |
| सहित | के साथ | together with |
| प्रभुहि | प्रभु राम को | Lord Rama (object of the gaze) |
| बिलोकति | निहार रही हैं | gazes upon |
| मातु | माता | the mother |
2परमानंद मगन मन पुनि पुनि पुलकित गातु॥ ७॥
एआई-निर्मित अर्थ-प्रारूप: माता का मन परम आनंद में मग्न है और उनका शरीर बार-बार रोमांचित हो रहा है।
English explanation
AI-generated draft meaning: The mother’s mind is immersed in supreme joy, and her body repeatedly thrills with goosebumps.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| परमानंद | परम आनंद में | in supreme joy |
| मगन | मग्न | immersed |
| मन | मन | the mind |
| पुनि | फिर | again |
| पुनि | फिर | again |
| पुलकित | रोमांचित; जिसके रोंगटे खड़े हों | thrilled, with goosebumps |
| गातु | शरीर | the body |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 7
- स्रोत अभिलेख
- 7.7
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका स्वागत, भरत-मिलाप, सबका मिलनानन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 914, 915
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।