उत्तरकाण्ड · दोहा 6 (ख) · दोहा
लछिमन सब मातन्ह मिलि हरषे आसिष पाइ।
लछिमन सब मातन्ह मिलि हरषे आसिष पाइ।
कैकइ कहँ पुनि पुनि मिले मन कर छोभु न जाइ॥ ६ (ख)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.6 · पुस्तक पृ. 913, 913
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1लछिमन सब मातन्ह मिलि हरषे आसिष पाइ।
लक्ष्मण सभी माताओं से मिलकर और उनका आशीर्वाद पाकर प्रसन्न हुए।
English explanation
Lakshmana rejoiced after meeting all his mothers and receiving their blessings.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लछिमन | लक्ष्मण, राम के छोटे भाई | Lakshmana, Rama's younger brother |
| सब | सभी | all |
| मातन्ह | माताओं से | his mothers |
| मिलि | मिलकर | having met |
| हरषे | प्रसन्न हुए | rejoiced |
| आसिष | आशीर्वाद | blessings |
| पाइ | पाकर | having received |
2कैकइ कहँ पुनि पुनि मिले मन कर छोभु न जाइ॥ ६ (ख)॥
कैकई से बार-बार मिले, फिर भी उनके मन की व्याकुलता दूर नहीं होती थी।
English explanation
He met Kaikeyi repeatedly, yet the distress in her mind would not go away.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कैकइ | कैकई, राम की विमाता | Kaikeyi, Rama's stepmother |
| कहँ | से | with |
| पुनि | फिर | again |
| पुनि | फिर | again |
| मिले | मिले | met |
| मन | मन | mind |
| कर | का | of |
| छोभु | क्षोभ; व्याकुलता | distress; agitation |
| न | नहीं | not |
| जाइ | दूर होता | go away |
| ख | पद्य-संदर्भ का अक्षर-चिह्न | verse-reference letter marker |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 6 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 7.6
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका स्वागत, भरत-मिलाप, सबका मिलनानन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 913, 913
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