उत्तरकाण्ड · दोहा 8 (क) · दोहा
कौसल्या के चरनन्हि पुनि तिन्ह नायउ माथ।
कौसल्या के चरनन्हि पुनि तिन्ह नायउ माथ।
आसिष दीन्हे हरषि तुम्ह प्रिय मम जिमि रघुनाथ॥ ८ (क)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.8 · पुस्तक पृ. 915, 916
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1कौसल्या के चरनन्हि पुनि तिन्ह नायउ माथ।
एआई-प्रारूप अर्थ: फिर उन्होंने कौसल्या के चरणों में सिर झुकाया।
English explanation
AI-draft meaning: Then they bowed their heads at Kausalya’s feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कौसल्या | श्रीराम की माता कौसल्या | Kausalya, Rama’s mother |
| के | के | of |
| चरनन्हि | चरणों में | at the feet |
| पुनि | फिर | then; again |
| तिन्ह | उन्होंने | they |
| नायउ | झुकाया | bowed |
| माथ | सिर | head |
2आसिष दीन्हे हरषि तुम्ह प्रिय मम जिमि रघुनाथ॥ ८ (क)॥
एआई-प्रारूप अर्थ: कौसल्या ने प्रसन्न होकर आशीर्वाद दिया: “तुम मुझे वैसे ही प्रिय हो जैसे रघुनाथ।”
English explanation
AI-draft meaning: Kausalya joyfully gave her blessing: “You are as dear to me as Rama.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आसिष | आशीर्वाद | blessing |
| दीन्हे | दिया | gave |
| हरषि | प्रसन्न होकर | joyfully |
| तुम्ह | तुम | you |
| प्रिय | प्रिय | dear |
| मम | मुझे; मेरे लिए | to me |
| जिमि | जैसे | as |
| रघुनाथ | रघुकुल के स्वामी श्रीराम | Rama, lord of Raghu’s lineage |
| क | पद-संदर्भ का चिह्न ‘क’ | verse-reference marker ‘क’ |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 8 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 7.8
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका स्वागत, भरत-मिलाप, सबका मिलनानन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 915, 916
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।