उत्तरकाण्ड · दोहा 8 (ख) · दोहा
सुमन बृष्टि नभ संकुल भवन चले सुखकंद।
सुमन बृष्टि नभ संकुल भवन चले सुखकंद।
चढ़ी अटारिन्ह देखहिं नगर नारि नर बृंद॥ ८ (ख)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.8 · पुस्तक पृ. 915, 916
भावार्थ और शब्दार्थ
1सुमन बृष्टि नभ संकुल भवन चले सुखकंद।
एआई-प्रारूप अर्थ: फूलों की वर्षा से आकाश भर गया; सुख के स्रोत श्रीराम भवन की ओर चले।
English explanation
AI-draft meaning: A shower of flowers filled the sky; Rama, the source of joy, proceeded toward the palace.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुमन | फूलों की | of flowers |
| बृष्टि | वर्षा | shower |
| नभ | आकाश | sky |
| संकुल | भरा हुआ | filled |
| भवन | भवन की ओर | toward the palace |
| चले | चले | proceeded |
| सुखकंद | सुख के मूल स्रोत श्रीराम | Rama, the source of joy |
2चढ़ी अटारिन्ह देखहिं नगर नारि नर बृंद॥ ८ (ख)॥
एआई-प्रारूप अर्थ: नगर की स्त्रियों और पुरुषों के समूह अटारियों पर चढ़कर उन्हें देखते हैं।
English explanation
AI-draft meaning: Groups of women and men of the city climb onto the terraces and watch him.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चढ़ी | चढ़कर | having climbed |
| अटारिन्ह | अटारियों पर | onto the terraces |
| देखहिं | देखते हैं | watch; look at |
| नगर | नगर के | of the city |
| नारि | स्त्रियाँ | women |
| नर | पुरुष | men |
| बृंद | समूह | groups; crowds |
| ख | पद-संदर्भ का चिह्न ‘ख’ | verse-reference marker ‘ख’ |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 8 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 7.8
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका स्वागत, भरत-मिलाप, सबका मिलनानन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 915, 916
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।