उत्तरकाण्ड · दोहा 9 (क) · दोहा
नारि कुमुदिनीं अवध सर रघुपति बिरह दिनेस।
नारि कुमुदिनीं अवध सर रघुपति बिरह दिनेस।
अस्त भएँ बिगसत भईं निरखि राम राकेस॥ ९ (क)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.9 · पुस्तक पृ. 916, 917
भावार्थ और शब्दार्थ
1नारि कुमुदिनीं अवध सर रघुपति बिरह दिनेस।
एआई-प्रारूप अर्थ: अवध रूपी सरोवर में स्त्रियाँ कुमुदिनियाँ हैं और राम का विरह सूर्य है।
English explanation
AI-draft meaning: In the lake that is Ayodhya, the women are night-blooming water lilies, and separation from Rama is the sun.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नारि | स्त्रियाँ | the women |
| कुमुदिनीं | कुमुदिनियाँ; रात में खिलने वाली जल-कुमुदियाँ | night-blooming water lilies |
| अवध | अयोध्या | Ayodhya |
| सर | सरोवर | lake |
| रघुपति | रघुकुल के स्वामी राम का | of Rama, lord of the Raghu lineage |
| बिरह | विरह; वियोग | separation |
| दिनेस | सूर्य | the sun |
2अस्त भएँ बिगसत भईं निरखि राम राकेस॥ ९ (क)॥
उस विरह रूपी सूर्य के अस्त होने पर राम रूपी चंद्रमा को देखकर वे स्त्रियाँ रूपी कुमुदिनियाँ खिल उठीं।
English explanation
When that sun of separation set, the women, like night lilies, blossomed on beholding Rama, the moon.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस्त | अस्त; डूबा हुआ | set; sunk below the horizon |
| भएँ | होने पर | upon becoming |
| बिगसत | खिलती हुई | blossoming |
| भईं | हो गईं | became |
| निरखि | देखकर | on beholding |
| राम | भगवान राम को | Lord Rama |
| राकेस | चंद्रमा रूपी | as the moon |
| क | पद-संदर्भ चिह्न (क) | verse reference marker (a) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 9 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 7.9
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका स्वागत, भरत-मिलाप, सबका मिलनानन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 916, 917
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।