उत्तरकाण्ड · दोहा 9 (ख) · दोहा
होहिं सगुन सुभ बिबिध बिधि बाजहिं गगन निसान।
होहिं सगुन सुभ बिबिध बिधि बाजहिं गगन निसान।
पुर नर नारि सनाथ करि भवन चले भगवान॥ ९ (ख) ॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.9 · पुस्तक पृ. 916, 917
भावार्थ और शब्दार्थ
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1होहिं सगुन सुभ बिबिध बिधि बाजहिं गगन निसान।
विविध प्रकार के शुभ शकुन होने लगे और आकाश में नगाड़े बजने लगे।
English explanation
Auspicious omens occurred in various ways, and kettledrums sounded in the sky.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| होहिं | होते हैं; होने लगे | occur; began to occur |
| सगुन | शकुन | omens |
| सुभ | शुभ; मंगलकारी | auspicious |
| बिबिध | विविध; अनेक | various |
| बिधि | प्रकार से | in ways |
| बाजहिं | बजते हैं; बजने लगे | sound; began to sound |
| गगन | आकाश में | in the sky |
| निसान | नगाड़े | kettledrums |
2पुर नर नारि सनाथ करि भवन चले भगवान॥ ९ (ख) ॥
नगर के पुरुषों और स्त्रियों को अपने संरक्षण से सनाथ करके भगवान राम राजभवन की ओर चले।
English explanation
Having given the city's men and women the assurance of his protection, Lord Rama proceeded to the palace.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुर | नगर के | of the city |
| नर | पुरुषों को | the men |
| नारि | स्त्रियों को | the women |
| सनाथ | स्वामी और रक्षक से युक्त; आश्रय प्राप्त | having a lord and protector; sheltered |
| करि | करके | having made |
| भवन | राजभवन की ओर | to the palace |
| चले | चले; प्रस्थान किया | proceeded |
| भगवान | भगवान राम | Lord Rama |
| ख | पद-संदर्भ चिह्न (ख) | verse reference marker (b) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 9 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 7.9
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका स्वागत, भरत-मिलाप, सबका मिलनानन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 916, 917
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