उत्तरकाण्ड · दोहा 76 · दोहा
रेखा त्रय सुंदर उदर नाभी रुचिर गँभीर।
रेखा त्रय सुंदर उदर नाभी रुचिर गँभीर।
उर आयत भ्राजत बिबिधि बाल बिभूषन चीर॥ ७६॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.76 · पुस्तक पृ. 979, 979
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1रेखा त्रय सुंदर उदर नाभी रुचिर गँभीर।
एआई प्रारूप: उदर पर तीन सुंदर रेखाएँ हैं और नाभि मनोहर तथा गहरी है।
English explanation
AI draft: The belly has three beautiful folds, and the navel is lovely and deep.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रेखा | रेखाएँ; उदर की वलियाँ | lines or folds of the belly |
| त्रय | तीन | three |
| सुंदर | सुंदर | beautiful |
| उदर | पेट; उदर | belly |
| नाभी | नाभि | navel |
| रुचिर | मनोहर | lovely |
| गँभीर | गहरी | deep |
2उर आयत भ्राजत बिबिधि बाल बिभूषन चीर॥ ७६॥
वक्षस्थल चौड़ा है; विविध बालोचित आभूषण और वस्त्र सुशोभित हो रहे हैं।
English explanation
The chest is broad; various ornaments and garments suited to a child shine beautifully.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उर | वक्षस्थल; छाती | chest |
| आयत | विस्तृत; चौड़ा | broad; expansive |
| भ्राजत | शोभित हो रहे हैं | shine; are resplendent |
| बिबिधि | विविध; अनेक प्रकार के | various; of many kinds |
| बाल | बालक के योग्य; बालोचित | suited to a child |
| बिभूषन | आभूषण | ornaments |
| चीर | वस्त्र | garments |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 76
- स्रोत अभिलेख
- 7.76
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 979, 979
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