उत्तरकाण्ड · दोहा 75 (ख) · दोहा/सोरठा
एक बार अतिसय सब चरित किए रघुबीर।
एक बार अतिसय सब चरित किए रघुबीर।
सुमिरत प्रभु लीला सोइ पुलकित भयउ सरीर।।75(ख)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.75 · पुस्तक पृ. 978, 979
भावार्थ और शब्दार्थ
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1 एक बार अतिसय सब चरित किए रघुबीर।
एक बार रघुवीर राम ने अत्यंत अद्भुत लीलाएँ कीं।
English explanation
Once, Rama, the hero of Raghu’s lineage, performed deeds that were all exceedingly wondrous.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एक | एक | one |
| बार | बार | occasion |
| अतिसय | अत्यंत अद्भुत | exceedingly wondrous |
| सब | सभी | all |
| चरित | लीलाएँ; कृत्य | deeds; divine plays |
| किए | किए | performed |
| रघुबीर | रघुकुल के वीर राम ने | Rama, hero of Raghu’s lineage |
2 सुमिरत प्रभु लीला सोइ पुलकित भयउ सरीर।।75(ख)।।
प्रभु की उसी लीला को याद करते ही मेरा शरीर रोमांचित हो गया।
English explanation
On remembering that very play of the Lord, my body thrilled with goosebumps.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुमिरत | स्मरण करते ही | on remembering |
| प्रभु | प्रभु की | the Lord’s |
| लीला | लीला | divine play |
| सोइ | वही | that very |
| पुलकित | रोमांचित | thrilled with goosebumps |
| भयउ | हो गया | became |
| सरीर | मेरा शरीर | my body |
| ख | पद-संदर्भ चिह्न (ख) | verse reference marker (b) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 75 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 7.75
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 978, 979
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