उत्तरकाण्ड · दोहा 75 (क) · दोहा/सोरठा
लरिकाईं जहँ जहँ फिरहिं तहँ तहँ संग उड़ाउँ।
लरिकाईं जहँ जहँ फिरहिं तहँ तहँ संग उड़ाउँ।
जूठनि परइ अजिर महँ सो उठाइ करि खाउँ।।75(क)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.75 · पुस्तक पृ. 978, 979
भावार्थ और शब्दार्थ
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1लरिकाईं जहँ जहँ फिरहिं तहँ तहँ संग उड़ाउँ।
बाल्यावस्था में राम जहाँ-जहाँ घूमते हैं, वहाँ-वहाँ मैं उनके साथ उड़ता हूँ।
English explanation
Wherever Rama wanders in childhood, I fly along with him.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लरिकाईं | बाल्यावस्था में | in childhood |
| जहँ | जहाँ | where |
| जहँ | जहाँ भी | wherever |
| फिरहिं | वे घूमते हैं | he wanders |
| तहँ | वहाँ | there |
| तहँ | हर उस स्थान पर | at each such place |
| संग | साथ | along with him |
| उड़ाउँ | मैं उड़ता हूँ | I fly |
2 जूठनि परइ अजिर महँ सो उठाइ करि खाउँ।।75(क)।।
आँगन में जो जूठन गिरती है, उसे उठाकर मैं खाता हूँ।
English explanation
I pick up and eat the food remnants that fall in the courtyard.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जूठनि | खाने की जूठन | food remnants |
| परइ | गिरती है | falls |
| अजिर | आँगन | courtyard |
| महँ | में | in |
| सो | उसे | that |
| उठाइ | उठाकर | picking up |
| करि | करके | having done so |
| खाउँ | मैं खाता हूँ | I eat |
| क | पद-संदर्भ चिह्न (क) | verse reference marker (a) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 75 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 7.75
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 978, 979
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