उत्तरकाण्ड · दोहा 77 (क) · दोहा
आवत निकट हँसहिं प्रभु भाजत रुदन कराहिं।
आवत निकट हँसहिं प्रभु भाजत रुदन कराहिं।
जाउँ समीप गहन पद फिरि फिरि चितइ पराहिं॥ ७७ (क)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.77 · पुस्तक पृ. 979, 980
भावार्थ और शब्दार्थ
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1आवत निकट हँसहिं प्रभु भाजत रुदन कराहिं।
मेरे पास आने पर प्रभु हँसते हैं और मेरे भागने पर रोने लगते हैं।
English explanation
When I come near, the Lord laughs; when I run away, he cries.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आवत | मेरे आने पर | when I approach |
| निकट | पास | near |
| हँसहिं | हँसते हैं | laughs |
| प्रभु | प्रभु श्रीराम, बालरूप में | Lord Rama in his child form |
| भाजत | मेरे भागने पर | when I run away |
| रुदन | रोना | crying |
| कराहिं | करते हैं | does |
2जाउँ समीप गहन पद फिरि फिरि चितइ पराहिं॥ ७७ (क)॥
जब मैं उनके चरण पकड़ने के लिए पास जाता हूँ, तो वे बार-बार पीछे देखकर भाग जाते हैं।
English explanation
When I go near to grasp his feet, he runs away, looking back repeatedly.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जाउँ | मैं जाऊँ | when I go |
| समीप | पास | near |
| गहन | पकड़ने के लिए | to grasp |
| पद | उनके चरण | his feet |
| फिरि | फिर | again |
| फिरि | फिर | again |
| चितइ | पीछे देखकर | looking back |
| पराहिं | भाग जाते हैं | runs away |
| क | दोहा ७७ के पहले भाग का संदर्भ-चिह्न | reference marker for the first part of couplet 77 |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 77 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 7.77
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 979, 980
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।