उत्तरकाण्ड · दोहा 77 (ख) · दोहा
प्राकृत सिसु इव लीला देखि भयउ मोहि मोह।
प्राकृत सिसु इव लीला देखि भयउ मोहि मोह।
कवन चरित्र करत प्रभु चिदानंद संदोह॥ ७७ (ख)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.77 · पुस्तक पृ. 979, 980
भावार्थ और शब्दार्थ
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1प्राकृत सिसु इव लीला देखि भयउ मोहि मोह।
साधारण बालक जैसी उनकी लीला देखकर मुझे मोह हो गया।
English explanation
Seeing his play like that of an ordinary child, I became bewildered.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्राकृत | साधारण | ordinary |
| सिसु | बालक | child |
| इव | के समान | like |
| लीला | बाल-क्रीड़ा | childlike play |
| देखि | देखकर | having seen |
| भयउ | हो गया | arose |
| मोहि | मुझे | in me |
| मोह | मोह या भ्रम | bewilderment |
2कवन चरित्र करत प्रभु चिदानंद संदोह॥ ७७ (ख)॥
चेतना और आनंद की राशि प्रभु यह कैसी लीला कर रहे हैं?
English explanation
What sort of play is the Lord, the very fullness of consciousness and bliss, performing?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कवन | कैसा | what sort of |
| चरित्र | लीला या आचरण | play or conduct |
| करत | कर रहे हैं | is performing |
| प्रभु | प्रभु श्रीराम | Lord Rama |
| चिदानंद | चेतना और आनंद | consciousness and bliss |
| संदोह | राशि या समग्र स्वरूप | fullness or embodiment |
| ख | दोहा ७७ के दूसरे भाग का संदर्भ-चिह्न | reference marker for the second part of couplet 77 |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 77 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 7.77
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 979, 980
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