उत्तरकाण्ड · दोहा 78 (क) · दोहा
रामचंद्र के भजन बिनु जो चह पद निर्बान।
रामचंद्र के भजन बिनु जो चह पद निर्बान।
ग्यानवंत अपि सो नर पसु बिनु पूँछ बिषान॥ ७८ (क)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.78 · पुस्तक पृ. 981, 981
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1रामचंद्र के भजन बिनु जो चह पद निर्बान।
AI-निर्मित अर्थ-प्रारूप: जो रामचंद्र के भजन के बिना मुक्ति का पद चाहता है—
English explanation
AI-generated draft meaning: Whoever seeks the state of liberation without devotion to Lord Rama—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रामचंद्र | भगवान राम | Lord Rama |
| के | के | of; to |
| भजन | भक्ति और स्मरण | devotion and remembrance |
| बिनु | बिना | without |
| जो | जो व्यक्ति | whoever |
| चह | चाहता है | desires |
| पद | अवस्था या परम पद | state or supreme goal |
| निर्बान | मुक्ति का | of liberation |
2ग्यानवंत अपि सो नर पसु बिनु पूँछ बिषान॥ ७८ (क)॥
वह मनुष्य ज्ञानवान होने पर भी पूँछ और सींगों के बिना पशु के समान है।
English explanation
Even if learned, that person is like an animal without a tail or horns.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ग्यानवंत | ज्ञानवान | learned; possessing knowledge |
| अपि | होने पर भी | even though |
| सो | वह | that |
| नर | मनुष्य | person |
| पसु | पशु | animal |
| बिनु | बिना | without |
| पूँछ | पूँछ | a tail |
| बिषान | सींग | horns |
| क | पद-संदर्भ का चिह्न ‘क’ | verse-reference marker ‘क’ |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 78 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 7.78
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 981, 981
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