उत्तरकाण्ड · दोहा 21 · दोहा
राम राज नभगेस सुनु सचराचर जग माहिं।
राम राज नभगेस सुनु सचराचर जग माहिं।
काल कर्म सुभाव गुन कृत दुख काहुहि नाहिं॥ २१॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.21 · पुस्तक पृ. 930, 931
भावार्थ और शब्दार्थ
1राम राज नभगेस सुनु सचराचर जग माहिं।
एआई-प्रारूप: हे पक्षिराज गरुड़, सुनो—राम के राज्य में चर-अचर सहित समस्त जगत में किसी को भी काल, कर्म, स्वभाव और गुणों से उत्पन्न दुःख नहीं है (अगली पंक्ति में वाक्य पूरा होता है)।
English explanation
AI draft: Hear, O Garuda, king of birds: under Rama’s rule, throughout the world of moving and unmoving beings, no one suffers sorrow caused by time, karma, nature, or the qualities of nature (the sentence continues in the next line).
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | भगवान राम का | of Lord Rama |
| राज | राज्य में | under the rule |
| नभगेस | हे पक्षिराज गरुड़ | O Garuda, king of birds |
| सुनु | सुनो | listen |
| सचराचर | चर और अचर प्राणियों सहित | including moving and unmoving beings |
| जग | जगत | the world |
| माहिं | में | in |
2काल कर्म सुभाव गुन कृत दुख काहुहि नाहिं॥ २१॥
एआई-प्रारूप: किसी को भी काल, कर्म, स्वभाव और गुणों से उत्पन्न दुःख नहीं है।
English explanation
AI draft: No one experiences sorrow caused by time, karma, inherent nature, or the qualities of nature.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| काल | काल से | by time |
| कर्म | कर्म से | by karma |
| सुभाव | स्वभाव से | by inherent nature |
| गुन | प्रकृति के गुणों से | by the qualities of nature |
| कृत | उत्पन्न | caused |
| दुख | दुःख | sorrow |
| काहुहि | किसी को भी | to anyone |
| नाहिं | नहीं है | there is none |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 21
- स्रोत अभिलेख
- 7.21
- सहायक विषय
- रामराज्यका वर्णन
- मुद्रित पृष्ठ
- 930, 931
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।