उत्तरकाण्ड · दोहा 22 · दोहा
दंड जतिन्ह कर भेद जहँ नर्तक नृत्य समाज।
दंड जतिन्ह कर भेद जहँ नर्तक नृत्य समाज।
जीतहु मनहि सुनिअ अस रामचंद्र कें राज॥ २२॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.22 · पुस्तक पृ. 931, 932
भावार्थ और शब्दार्थ
1दंड जतिन्ह कर भेद जहँ नर्तक नृत्य समाज।
एआई-प्रारूप अर्थ: वहाँ दंड केवल यतियों का धारण किया हुआ दंड था और भेद केवल नर्तकों के नृत्य-समाज में था।
English explanation
AI-draft meaning: There, the rod existed only as the ascetics’ staff, and distinctions only in gatherings of dancers and dance.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दंड | यतियों का दंड; दंड देने का अर्थ भी संकेतित | ascetics’ staff; also evokes punishment |
| जतिन्ह | यतियों, संयमी संन्यासियों | of ascetics or renunciants |
| कर | का | belonging to |
| भेद | नृत्य के भेद; फूट का अर्थ भी संकेतित | distinctions in dance; also evokes division |
| जहँ | जहाँ, उस राज्य में | where, in that kingdom |
| नर्तक | नर्तकों के | of dancers |
| नृत्य | नृत्य के | of dance |
| समाज | समाज या मंडली में | in the gathering or company |
2जीतहु मनहि सुनिअ अस रामचंद्र कें राज॥ २२॥
रामचंद्र के राज्य में ऐसा सुनने में आता था कि ‘जीतो’ केवल अपने मन के लिए कहा जाता था।
English explanation
In Lord Rama’s reign, the call to ‘conquer’ was heard only with reference to one’s own mind.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जीतहु | जीतो, वश में करो | conquer; bring under control |
| मनहि | मन को ही | the mind alone |
| सुनिअ | सुना जाता है | is heard |
| अस | ऐसा | thus; such |
| रामचंद्र | भगवान रामचंद्र | Lord Rama |
| कें | के | of |
| राज | राज्य या शासन में | in the kingdom or reign |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 22
- स्रोत अभिलेख
- 7.22
- सहायक विषय
- रामराज्यका वर्णन
- मुद्रित पृष्ठ
- 931, 932
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