उत्तरकाण्ड · दोहा 23 · दोहा
बिधु महि पूर मयूखन्हि रबि तप जेतनेहि काज।
बिधु महि पूर मयूखन्हि रबि तप जेतनेहि काज।
मागें बारिद देहिं जल रामचंद्र कें राज॥ २३॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.23 · पुस्तक पृ. 932, 933
भावार्थ और शब्दार्थ
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1बिधु महि पूर मयूखन्हि रबि तप जेतनेहि काज।
चंद्रमा अपनी किरणों से पृथ्वी को भर देता है और सूर्य उतना ही तपता है जितने की आवश्यकता होती है।
English explanation
The moon bathes the earth in its rays, and the sun gives only as much heat as is needed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिधु | चंद्रमा | the moon |
| महि | पृथ्वी को | the earth |
| पूर | भर देता है | fills; bathes |
| मयूखन्हि | किरणों से | with its rays |
| रबि | सूर्य | the sun |
| तप | तपता है; गर्मी देता है | gives heat |
| जेतनेहि | जितना ही | only as much as |
| काज | आवश्यकता है | is needed |
2मागें बारिद देहिं जल रामचंद्र कें राज॥ २३॥
रामचंद्र के राज्य में माँगने पर बादल जल देते हैं।
English explanation
In Lord Rama’s reign, the clouds give rain when it is asked for.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मागें | माँगने पर | when asked for |
| बारिद | बादल | the clouds |
| देहिं | देते हैं | give |
| जल | जल; वर्षा का पानी | water; rain |
| रामचंद्र | भगवान राम | Lord Rama |
| कें | के | of |
| राज | राज्य में; शासनकाल में | in the reign |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 23
- स्रोत अभिलेख
- 7.23
- सहायक विषय
- रामराज्यका वर्णन
- मुद्रित पृष्ठ
- 932, 933
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