उत्तरकाण्ड · दोहा 20 · दोहा
बरनाश्रम निज निज धरम निरत बेद पथ लोग।
बरनाश्रम निज निज धरम निरत बेद पथ लोग।
चलहिं सदा पावहिं सुखहि नहिं भय सोक न रोग॥ २०॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.2 · पुस्तक पृ. 930, 930
भावार्थ और शब्दार्थ
1बरनाश्रम निज निज धरम निरत बेद पथ लोग।
एआई-प्रारूप: लोग अपने-अपने वर्ण और आश्रम के धर्म में तत्पर होकर वेद के बताए मार्ग पर चलते हैं।
English explanation
AI draft: People follow the path prescribed by the Vedas, devoted to the duties of their respective social orders and stages of life.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बरनाश्रम | वर्ण और आश्रम के अनुसार | according to social order and stage of life |
| निज | अपने | their own |
| निज | अपने | respective |
| धरम | कर्तव्य या धर्म में | in prescribed duties |
| निरत | तत्पर; लगे हुए | devoted; engaged |
| बेद | वेद के बताए | prescribed by the Vedas |
| पथ | मार्ग पर | on the path |
| लोग | लोग | people |
2चलहिं सदा पावहिं सुखहि नहिं भय सोक न रोग॥ २०॥
एआई-प्रारूप: वे सदा उस मार्ग पर चलते हैं और सुख पाते हैं; उन्हें न भय है, न शोक, न रोग।
English explanation
AI draft: They always follow that path and enjoy happiness; they have neither fear, sorrow, nor illness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चलहिं | चलते हैं | follow; walk |
| सदा | सदैव | always |
| पावहिं | प्राप्त करते हैं | attain; receive |
| सुखहि | सुख को | happiness |
| नहिं | नहीं है | there is no |
| भय | डर | fear |
| सोक | शोक; दुःख | sorrow; grief |
| न | न ही | nor |
| रोग | बीमारी | illness |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 20
- स्रोत अभिलेख
- 7.2
- सहायक विषय
- रामराज्यका वर्णन
- मुद्रित पृष्ठ
- 930, 930
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।