उत्तरकाण्ड · दोहा 19 (ग) · दोहा
कुलिसहु चाहि कठोर अति कोमल कुसुमहु चाहि।
कुलिसहु चाहि कठोर अति कोमल कुसुमहु चाहि।
चित्त खगेस राम कर समुझि परइ कहु काहि॥ १९ (ग)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.19 · पुस्तक पृ. 928, 929
भावार्थ और शब्दार्थ
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1कुलिसहु चाहि कठोर अति कोमल कुसुमहु चाहि।
राम का हृदय वज्र से भी अधिक कठोर और फूल से भी अत्यंत कोमल है।
English explanation
Rama’s heart is harder than even a thunderbolt, yet exceedingly tender, more so than even a flower.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कुलिसहु | वज्र से भी | than even a thunderbolt |
| चाहि | से बढ़कर; अपेक्षा | in comparison with; beyond |
| कठोर | कठोर | hard |
| अति | अत्यंत | exceedingly |
| कोमल | कोमल | tender |
| कुसुमहु | फूल से भी | than even a flower |
| चाहि | से बढ़कर; अपेक्षा | in comparison with; beyond |
2चित्त खगेस राम कर समुझि परइ कहु काहि॥ १९ (ग)॥
हे पक्षिराज गरुड़, बताओ, राम का हृदय किसकी समझ में आता है?
English explanation
O Garuda, king of birds, tell me: who can comprehend Rama’s heart?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चित्त | हृदय; मन | heart; mind |
| खगेस | हे पक्षिराज गरुड़ | O Garuda, king of birds |
| राम | भगवान राम | Lord Rama |
| कर | का | of; belonging to |
| समुझि | समझ में | into understanding |
| परइ | आता है; पड़ता है | comes; falls |
| कहु | कहो; बताओ | say; tell me |
| काहि | किसको; किसकी | to whom; whose |
| ग | पद-संदर्भ चिह्न (ग) | verse reference marker (c) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 19 (ग)
- स्रोत अभिलेख
- 7.19
- सहायक विषय
- वानरोंकी और निषादकी विदाई
- मुद्रित पृष्ठ
- 928, 929
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