उत्तरकाण्ड · दोहा 128 · दोहा
राम चरन रति जो चह अथवा पद निर्बान।
राम चरन रति जो चह अथवा पद निर्बान।
भाव सहित सो यह कथा करउ श्रवन पुट पान॥ १२८॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.128 · पुस्तक पृ. 1043, 1043
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1राम चरन रति जो चह अथवा पद निर्बान।
एआई-प्रारूप: जो राम के चरणों में प्रेम अथवा निर्वाण की अवस्था चाहता है…
English explanation
AI draft: Whoever desires love for Rama’s feet or the state of liberation…
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | भगवान राम के | of Lord Rama |
| चरन | चरणों में | for the feet |
| रति | प्रेम; अनुराग | love; devotion |
| जो | जो व्यक्ति | whoever |
| चह | चाहता है | desires |
| अथवा | या | or |
| पद | अवस्था; परम स्थिति | state; ultimate condition |
| निर्बान | निर्वाण; मुक्ति की | of liberation |
2भाव सहित सो यह कथा करउ श्रवन पुट पान॥ १२८॥
एआई-प्रारूप: वह श्रद्धा-भाव सहित इस कथा को कानों के दोने से पिए, अर्थात ध्यानपूर्वक सुने।
English explanation
AI draft: Let that person drink in this narrative with devotion, using the ears as a cup—that is, listen attentively.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भाव | श्रद्धा और प्रेम के भाव | a feeling of faith and devotion |
| सहित | के साथ | with |
| सो | वह व्यक्ति | that person |
| यह | इस | this |
| कथा | कथा का | narrative |
| करउ | करे | let them perform |
| श्रवन | कानों के | of the ears |
| पुट | दोने; पात्र से | with the cup; receptacle |
| पान | पान; पीना | drinking in |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 128
- स्रोत अभिलेख
- 7.128
- सहायक विषय
- रामायण-माहात्म्य, तुलसी-विनय और फलस्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 1043, 1043
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