उत्तरकाण्ड · दोहा 127 · दोहा
सो कुल धन्य उमा सुनु जगत पूज्य सुपुनीत।
सो कुल धन्य उमा सुनु जगत पूज्य सुपुनीत।
श्रीरघुबीर परायन जेहिं नर उपज बिनीत॥ १२७॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.127 · पुस्तक पृ. 1042, 1042
भावार्थ और शब्दार्थ
1सो कुल धन्य उमा सुनु जगत पूज्य सुपुनीत।
एआई-प्रारूप अर्थ: हे उमा, सुनो! वह कुल धन्य, संसार में पूजनीय और अत्यंत पवित्र है।
English explanation
AI-draft meaning: Listen, Uma! That family is blessed, worthy of reverence in the world, and most pure.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | वह | that |
| कुल | कुल; वंश | family; lineage |
| धन्य | धन्य; सौभाग्यशाली | blessed; fortunate |
| उमा | हे उमा, पार्वती! | O Uma, Goddess Parvati! |
| सुनु | सुनो | listen |
| जगत | संसार में | in the world |
| पूज्य | पूजनीय; आदरणीय | worthy of reverence |
| सुपुनीत | अत्यंत पवित्र | most pure |
2श्रीरघुबीर परायन जेहिं नर उपज बिनीत॥ १२७॥
एआई-प्रारूप अर्थ: जिसमें श्रीराम के प्रति समर्पित, विनम्र मनुष्य जन्म लेता है, वही कुल ऐसा धन्य है।
English explanation
AI-draft meaning: Such is the blessed family in which a humble person devoted to Lord Rama is born.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| श्रीरघुबीर | श्रीराम, रघुवंश के वीर | Lord Rama, the hero of Raghu’s lineage |
| परायन | के प्रति समर्पित | devoted to |
| जेहिं | जिसमें; जिस कुल में | in which family |
| नर | मनुष्य | person |
| उपज | जन्म लेता है | is born |
| बिनीत | विनम्र; विनीत | humble; modest |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 127
- स्रोत अभिलेख
- 7.127
- सहायक विषय
- रामायण-माहात्म्य, तुलसी-विनय और फलस्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 1042, 1042
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।